ब्रह्मनारायणस्तवः — शिवस्य प्रभवत्व-प्रतिपादनम्
पापाचारो ऽपि यो मर्त्यः शृणुयाच्छिवसन्निधौ जपेद्वापि विनिर्मुक्तो ब्रह्मलोकं स गच्छति
pāpācāro 'pi yo martyaḥ śṛṇuyācchivasannidhau japedvāpi vinirmukto brahmalokaṃ sa gacchati
पापाचारी भी जो मनुष्य शिव-सन्निधि में इसे सुनता है या जप करता है, वह बंधन से मुक्त होकर ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है।
Sūta Gosvāmin (narrating the Linga Purana to the sages of Naimiṣāraṇya)