ब्रह्मनारायणस्तवः — शिवस्य प्रभवत्व-प्रतिपादनम्
क्रोधाकारः प्रसन्नात्मा कामदः कामगः प्रियः ब्रह्मचारि चागाधश् च ब्रह्मण्यः शिष्टपूजितः
krodhākāraḥ prasannātmā kāmadaḥ kāmagaḥ priyaḥ brahmacāri cāgādhaś ca brahmaṇyaḥ śiṣṭapūjitaḥ
जिसका रूप क्रोध भी हो सकता है, पर जिसका अंतरात्मा सदा प्रसन्न है; जो धर्मसम्मत कामनाओं का दाता है और काम-शक्ति के रूप में सर्वत्र विचरता है—वह प्रिय है। वह ब्रह्मचारी, अगाध-अपरिमेय, ब्रह्म तथा ब्राह्मणों का हितैषी, और शिष्टों द्वारा पूजित है।
Suta Goswami (narrating a Shiva Sahasranama within the Linga Purana discourse)