ब्रह्मनारायणस्तवः — शिवस्य प्रभवत्व-प्रतिपादनम्
ध्यायते जृम्भते चैव रुदते द्रवते नमः वल्गते क्रीडते चैव लम्बोदरशरीरिणे
dhyāyate jṛmbhate caiva rudate dravate namaḥ valgate krīḍate caiva lambodaraśarīriṇe
लम्बोदर-शरीरधारी प्रभु को नमस्कार—जो ध्यान करता है, जो जँभाई लेता है, जो रोता है, जो करुणा से द्रवित होता है; जो उछलता है और जो क्रीड़ा करता है। बन्धनातीत पति की यह लीला सर्वावस्थाओं में विचरती है।
Suta Goswami (narrating a traditional stuti within the Purana’s discourse)