ब्रह्मनारायणस्तवः — शिवस्य प्रभवत्व-प्रतिपादनम्
कल्पोदयनिबन्धानां वातानां प्रभवे नमः नमो विश्वस्य प्रभवे ब्रह्माधिपतये नमः
kalpodayanibandhānāṃ vātānāṃ prabhave namaḥ namo viśvasya prabhave brahmādhipataye namaḥ
कल्पों के उदय और नियम-बंधन के प्रभव, तथा प्राण-वायुओं के स्रोत को नमस्कार। समस्त विश्व के प्रभव को नमस्कार; ब्रह्मा पर भी अधिपति प्रभु को नमस्कार।
Suta (narrating a stuti within the Purva-Bhaga context)