ईशानकल्पवृत्तान्तः तथा लैङ्गपुराणस्य संक्षेप-सूची
अण्डोद्भवत्वं शर्वस्य रजोगुणसमाश्रयात् विष्णुत्वं कालरुद्रत्वं शयनं चाप्सु तस्य च
aṇḍodbhavatvaṃ śarvasya rajoguṇasamāśrayāt viṣṇutvaṃ kālarudratvaṃ śayanaṃ cāpsu tasya ca
रजोगुण का आश्रय लेकर शर्व (शिव) अण्ड से उत्पन्न होने की अवस्था धारण करते हैं; उसी दिव्य लीला में वे विष्णु-भाव, कालरुद्र-रूप और जलों पर शयन की मुद्रा भी ग्रहण करते हैं।
Suta Goswami (narrating the cosmological doctrine to the sages of Naimisharanya)