विष्णुरुवाच—एकाक्षर-प्रणव-लिङ्ग-व्याप्ति-शिवस्तोत्रम्
ज्ञानाय ज्ञानगम्याय नमस्ते संविदे सदा शिखराय नमस्तुभ्यं नीलकण्ठाय वै नमः
jñānāya jñānagamyāya namaste saṃvide sadā śikharāya namastubhyaṃ nīlakaṇṭhāya vai namaḥ
ज्ञान-स्वरूप आपको नमः; जो सच्चे ज्ञान से ही प्राप्त होते हैं, उस सदा-स्थित संविद् को नमः। परम-शिखर को नमस्कार; नीलकण्ठ महादेव को निश्चय ही नमः।
Suta Goswami (narrating a Śiva-stuti within the Purva-Bhaga context)