ब्रह्मकृत-ईशानस्तवः तथा विश्वरूपदेवी-प्रकृतिरहस्योपदेशः
उवाच भगवान् रुद्रं प्रीतं प्रीतेन चेतसा यदिदं विश्वरूपं ते विश्वगौः श्रेयसीश्वरी
uvāca bhagavān rudraṃ prītaṃ prītena cetasā yadidaṃ viśvarūpaṃ te viśvagauḥ śreyasīśvarī
भगवान् ने प्रसन्न हृदय से प्रसन्न रुद्र से कहा—“तुम्हारा यह विश्वरूप ही वह विश्वगौ है, जो श्रेय की अधिष्ठात्री ईश्वरी, परम कल्याण देने वाली देवी है।”
Suta (narrating an internal dialogue where a divine speaker addresses Rudra)