पीतवासा-कल्पः, माहेश्वरी-दर्शनम्, रौद्री-गायत्री, महायोगेन अपुनर्भवः
ततो ऽस्य पार्श्वतो दिव्याः प्रादुर्भूताः कुमारकाः पीतमाल्यांबरधराः पीतस्रगनुलेपनाः
tato 'sya pārśvato divyāḥ prādurbhūtāḥ kumārakāḥ pītamālyāṃbaradharāḥ pītasraganulepanāḥ
फिर उनके दोनों पार्श्वों में दिव्य कुमार प्रकट हुए—पीली मालाएँ और पीत वस्त्र धारण किए, पीले पुष्पहार और सुगंधित अनुलेपन से विभूषित।
Suta Goswami