पीतवासा-कल्पः, माहेश्वरी-दर्शनम्, रौद्री-गायत्री, महायोगेन अपुनर्भवः
जपित्वा तु महादेवीं ब्रह्मा लोकनमस्कृताम् प्रपन्नस्तु महादेवं ध्यानयुक्तेन चेतसा
japitvā tu mahādevīṃ brahmā lokanamaskṛtām prapannastu mahādevaṃ dhyānayuktena cetasā
लोकों द्वारा नमस्कृत महादेवी का जप करके, ब्रह्मा ध्यान-युक्त चित्त से महादेव की शरण में गया।
Suta Goswami (narrating Brahmā’s act within the story)