उमास्वयंवरः / भवोद्वाहः, गणसमागमः, अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्यम्, तथा विनायक-उत्पत्तिसूचना
वाराणस्यां कृतं पापं पैशाच्यनरकावहम् कृत्वा पापसहस्राणि पिशाचत्वं वरं नृणाम्
vārāṇasyāṃ kṛtaṃ pāpaṃ paiśācyanarakāvaham kṛtvā pāpasahasrāṇi piśācatvaṃ varaṃ nṛṇām
वाराणसी में किया गया पाप पिशाच-नरक को देने वाला है। हजारों पाप कर लेने पर भी मनुष्यों के लिए पिशाचत्व ही (यहाँ के कठोर फल से) बेहतर माना गया है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya, within the Kashi-mahatmya context)