दक्षयज्ञध्वंसः—वीरभद्रप्रेषणं, देवविष्ण्वोः पराजयः, पुनरनुग्रहः
सूत उवाच दक्षयज्ञे सुविपुले देवान् विष्णुपुरोगमान् ददाह भगवान् रुद्रः सर्वान् मुनिगणान् अपि
sūta uvāca dakṣayajñe suvipule devān viṣṇupurogamān dadāha bhagavān rudraḥ sarvān munigaṇān api
सूत ने कहा—दक्ष के अत्यन्त विशाल यज्ञ में भगवान् रुद्र ने विष्णु के नेतृत्व वाले देवताओं को और समस्त मुनिगणों को भी भस्म कर दिया।
Suta