नैमिषारण्ये सूतागमनम् — लिङ्गमाहात्म्यभूमिका तथा शब्दब्रह्म-ओङ्कार-लिङ्गतत्त्वम्
तमसा कालरुद्राख्यं रजसा कनकाण्डजम् सत्त्वेन सर्वगं विष्णुं निर्गुणत्वे महेश्वरम्
tamasā kālarudrākhyaṃ rajasā kanakāṇḍajam sattvena sarvagaṃ viṣṇuṃ nirguṇatve maheśvaram
तमोगुण से वे कालरुद्र कहलाते हैं, रजोगुण से कनकाण्डज (हिरण्यगर्भ-ब्रह्मा), सत्त्वगुण से सर्वव्यापी विष्णु; और गुणातीत अवस्था में वे महेश्वर हैं।
Suta Goswami