अगम्यागमन-निष्कृति-निर्णयः
Expiations for Forbidden Sexual Relations
अथवा शङ्करं ध्यायञ्जप्त्वा त्रैय्यंबकं मनुम् / सो ऽहंभावेन तज्ज्ञानान्न दोषैः प्रविलिप्यते
athavā śaṅkaraṃ dhyāyañjaptvā traiyyaṃbakaṃ manum / so 'haṃbhāvena tajjñānānna doṣaiḥ pravilipyate
अथवा शंकर का ध्यान करके त्र्यंबक मंत्र का जप करे; ‘सोऽहं’ भाव से उस ज्ञान में स्थित होने पर वह दोषों से कभी लिप्त नहीं होता।