अगम्यागमन-निष्कृति-निर्णयः
Expiations for Forbidden Sexual Relations
इदं विष्णुरिति मन्त्रेण सप्तवाराभिमन्त्रितम् / सो ऽहंभावेन तद्ध्यात्वा भुक्त्वा दोषैर्न लिप्यते
idaṃ viṣṇuriti mantreṇa saptavārābhimantritam / so 'haṃbhāvena taddhyātvā bhuktvā doṣairna lipyate
‘इदं विष्णु है’ इस मंत्र से सात बार अभिमंत्रित अन्न को ‘सोऽहं’ भाव से ध्यान करके जो भोगता है, वह दोषों से लिप्त नहीं होता।