अगम्यागमन-निष्कृति-निर्णयः
Expiations for Forbidden Sexual Relations
इति ब्रह्माण्डमहापुराणे उत्तरभागे हयग्रीवागस्त्यसंवादे ललितोपाख्याने स्तेयपानकथनं नाम सप्तमो ऽध्यायः इन्द्र उवाच अगम्यागमनं किं वा को दोषः का च निष्कृतिः / एतन्मे मुनिशार्दूल विस्तराद्वक्तुमर्हसि
iti brahmāṇḍamahāpurāṇe uttarabhāge hayagrīvāgastyasaṃvāde lalitopākhyāne steyapānakathanaṃ nāma saptamo 'dhyāyaḥ indra uvāca agamyāgamanaṃ kiṃ vā ko doṣaḥ kā ca niṣkṛtiḥ / etanme muniśārdūla vistarādvaktumarhasi
इस प्रकार ब्रह्माण्डमहापुराण के उत्तरभाग में हयग्रीव–अगस्त्य संवाद के ललितोपाख्यान में ‘स्तेयपान-कथन’ नामक सातवाँ अध्याय है। इन्द्र बोले—अगम्यागमन क्या है, उसका दोष क्या है और उसकी प्रायश्चित्त-निष्कृति क्या है? हे मुनिशार्दूल, इसे मुझे विस्तार से कहिए।