महादेव्याः आविर्भाव-रूपान्तर-विहारवर्णनम्
Manifestation, Forms, and Divine Play of the Mahādevī
कैलासशिखराकारं गजेन्द्रमधिरुह्य सः / चचाराखिललोकेषु पूज्यमानो ऽखिलैरपि / तं प्रमत्तं विदित्वाथ भवानीपतिख्ययः
kailāsaśikharākāraṃ gajendramadhiruhya saḥ / cacārākhilalokeṣu pūjyamāno 'khilairapi / taṃ pramattaṃ viditvātha bhavānīpatikhyayaḥ
कैलास-शिखर के समान विशाल गजेन्द्र पर आरूढ़ होकर वह सब लोकों में विचरता था, और सभी के द्वारा पूजित होता था। फिर उसे प्रमत्त जानकर भवानीपति-ख्यात (शिव) ने…