महादेव्याः आविर्भाव-रूपान्तर-विहारवर्णनम्
Manifestation, Forms, and Divine Play of the Mahādevī
हयग्रीव उवाच पुरामरपुराधीशो विजयश्रीसमृद्धिमान् / त्रैलोक्यं पालयामास सदेवासुरमानुषम्
hayagrīva uvāca purāmarapurādhīśo vijayaśrīsamṛddhimān / trailokyaṃ pālayāmāsa sadevāsuramānuṣam
हयग्रीव बोले—पूर्वकाल में देवपुर के अधिपति, विजय-श्री से समृद्ध, देव-दानव-मनुष्यों सहित तीनों लोकों का पालन करते थे।