महादेव्याः आविर्भाव-रूपान्तर-विहारवर्णनम्
Manifestation, Forms, and Divine Play of the Mahādevī
दुर्वाससमथाहूय प्रजिघाय तदन्तिकम् / खण्डाजिनधरो दण्डीधूरिधूसरविग्रहः / उन्मत्तरूपधारी च ययौ विद्याधराध्वना
durvāsasamathāhūya prajighāya tadantikam / khaṇḍājinadharo daṇḍīdhūridhūsaravigrahaḥ / unmattarūpadhārī ca yayau vidyādharādhvanā
उसने दुर्वासा मुनि को बुलाकर अपने निकट भेजा। खण्डित मृगचर्म धारण किए, दण्ड लिए, धूल से धूसर देह वाले, उन्मत्त-से रूप में वह विद्याधरों के मार्ग से चला।