महादेव्याः आविर्भाव-रूपान्तर-विहारवर्णनम्
Manifestation, Forms, and Divine Play of the Mahādevī
अगस्त्य उवाच कथं वै सर्वभूतेशो वशी मन्मथ शासनः / अहो विमोहितो देव्या जनयामास चात्मजम्
agastya uvāca kathaṃ vai sarvabhūteśo vaśī manmatha śāsanaḥ / aho vimohito devyā janayāmāsa cātmajam
अगस्त्य बोले—जो सर्वभूतों के स्वामी और कामदेव को वश में करने वाले हैं, वे देवी से मोहित होकर पुत्र को कैसे उत्पन्न कर बैठे?