ललितोपाख्याने जप-न्यास-योगप्रकरणम्
Lalitopākhyāna: Procedure of Japa, Nyāsa, and Yogic Installation
मूलाद्याज्ञावसानेषु वर्गाष्टकमथो न्यसेत् / शषसान्मूर्ध्नि संन्यस्य स्वरानेष्वेव विन्यसेत्
mūlādyājñāvasāneṣu vargāṣṭakamatho nyaset / śaṣasānmūrdhni saṃnyasya svarāneṣveva vinyaset
मूलाधार से आज्ञाचक्र के अंत तक वर्गों के आठक का न्यास करे; फिर ‘श’ ‘ष’ ‘स’ को मस्तक पर स्थापित करके, स्वरों में ही उनका विन्यास करे।