Dīkṣā-bhedaḥ (Types of Initiation) — Lalitopākhyāna: Hayagrīva–Agastya Dialogue
जन्मान्तर सुकृतत्वं स्यान्न्यस्ते शिरसि पादुके / गुरुणा कमलासनमुरशासनपुरशासनसेवया लब्धे
janmāntara sukṛtatvaṃ syānnyaste śirasi pāduke / guruṇā kamalāsanamuraśāsanapuraśāsanasevayā labdhe
जब गुरु की पादुका मस्तक पर रखी जाती है, तब जन्म-जन्मांतर के पुण्य का फल प्राप्त होता है; यह कमलासन, मुरशासन और पुरशासन की सेवा से गुरु द्वारा प्राप्त है।