Dīkṣā-bhedaḥ (Types of Initiation) — Lalitopākhyāna: Hayagrīva–Agastya Dialogue
अद्यप्रभृति मे पुत्रान्रक्ष मां शारणागतम् / इत्युक्त्वा गुरुपादाव्जे शिष्यो मूर्ध्नि विधारयेत्
adyaprabhṛti me putrānrakṣa māṃ śāraṇāgatam / ityuktvā gurupādāvje śiṣyo mūrdhni vidhārayet
आज से मेरे पुत्रों की रक्षा करो, और मुझे शरणागत की भाँति बचाओ— ऐसा कहकर शिष्य गुरु के चरण-कमल को मस्तक पर धारण करे।