Śrī Kāmākṣī–Mahātripurasundarī: Immanence of Śakti and Cosmic Administration
Lalitopākhyāna
वक्त्रश्रिया विजितशारदचन्द्रबिंबे ताटङ्करत्नकरमण्डितगण्डभागे / वामे करे सरसिजं सुबिसं दधाने कारुण्यनिर्झरदपाङ्गयुते महेशि
vaktraśriyā vijitaśāradacandrabiṃbe tāṭaṅkaratnakaramaṇḍitagaṇḍabhāge / vāme kare sarasijaṃ subisaṃ dadhāne kāruṇyanirjharadapāṅgayute maheśi
हे महेश्वरी! जिनके मुख की शोभा शरद्-चन्द्रमा के बिंब को भी जीत लेती है, जिनके कपोल ताटंक के रत्नों की कान्ति से मंडित हैं। जिनके बाएँ हाथ में सुगंधित कमल है, और जिनकी कटाक्ष-धारा करुणा के निर्झर-सी बहती है—आपको प्रणाम।