ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
औन्नत्ये मेरुतुल्यः स्याद्गांभीर्येण महार्णवः / क्षणात्क्षोभकरो मूर्त्या ग्रामपल्लीपुरादिषु
aunnatye merutulyaḥ syādgāṃbhīryeṇa mahārṇavaḥ / kṣaṇātkṣobhakaro mūrtyā grāmapallīpurādiṣu
ऊँचाई में वह मेरु के समान और गाम्भीर्य में महा-सागर के तुल्य है। वह अपनी मूर्ति से ग्राम, पल्लियों और पुरों में क्षणभर में ही हलचल उत्पन्न कर देता है।