ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
एवं स सिद्धमन्त्रस्तु कुर्यात्काम्यजपं पुनः / लक्षमात्रं जपित्वा तु मनुष्यान्वशमानयेत्
evaṃ sa siddhamantrastu kuryātkāmyajapaṃ punaḥ / lakṣamātraṃ japitvā tu manuṣyānvaśamānayet
इस प्रकार सिद्ध-मंत्र वाला होकर फिर काम्य-जप करे। एक लाख जप करके मनुष्यों को वश में कर लेता है।