ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
तद्दशांशस्तु होमः स्यात्तद्दशांशं च तर्पणम् / तद्दशांशं ब्राह्मणानां भोजनं समुदीरितम्
taddaśāṃśastu homaḥ syāttaddaśāṃśaṃ ca tarpaṇam / taddaśāṃśaṃ brāhmaṇānāṃ bhojanaṃ samudīritam
उस जप का दसवाँ भाग होम हो; उसका भी दसवाँ भाग तर्पण हो। और उसका भी दसवाँ भाग ब्राह्मणों को भोजन कराना—ऐसा कहा गया है।