महापद्माटव्यार्घ्यस्थापनकथनम्
Establishing the Arghya in the Mahāpadmāṭavī
पूर्वोक्त मर्ध्यस्थानं च पूर्वोक्तं चार्ध्यकल्पनम् / याम्यद्वारप्रभृतिषु सर्वेष्वपि समं स्मृतम्
pūrvokta mardhyasthānaṃ ca pūrvoktaṃ cārdhyakalpanam / yāmyadvāraprabhṛtiṣu sarveṣvapi samaṃ smṛtam
पूर्व में कहा गया मध्य-स्थान और पूर्वोक्त अर्घ्य-कल्पना—याम्य द्वार आदि सभी स्थानों में समान रूप से मानी गई है।