महापद्माटव्यार्घ्यस्थापनकथनम्
Establishing the Arghya in the Mahāpadmāṭavī
भवनं दीपिताशेषदिक्चक्रं रत्नरश्मिभिः / समस्ता देवता एता ललिताभक्तिनिर्भराः / ललितामन्त्रजाप्याश्च श्रीदेवीं समुपासते
bhavanaṃ dīpitāśeṣadikcakraṃ ratnaraśmibhiḥ / samastā devatā etā lalitābhaktinirbharāḥ / lalitāmantrajāpyāśca śrīdevīṃ samupāsate
रत्न-किरणों से वह भवन समस्त दिशाचक्र को प्रकाशित करता था। ये सभी देवताएँ ललिता-भक्ति से परिपूर्ण होकर, ललिता-मंत्र का जप करती हुई श्रीदेवी की उपासना करती थीं।