दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
आनन्दवापिकागाधाः पूर्ववत्परिकीर्त्तिताः / सोपानादिक्रमश्चैव पक्षिणास्तत्र पूर्ववत्
ānandavāpikāgādhāḥ pūrvavatparikīrttitāḥ / sopānādikramaścaiva pakṣiṇāstatra pūrvavat
आनंद-वापिका की गहराइयाँ पहले की भाँति कही गई हैं। वहाँ सीढ़ियों आदि की व्यवस्था भी वैसी ही है, और पक्षी भी वहाँ पूर्ववत् ही हैं।