दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
सहस्रस्तम्भशालस्यातरमारुतयोजने / मनो नाम महाशालः सर्वरत्नविचित्रितः
sahasrastambhaśālasyātaramārutayojane / mano nāma mahāśālaḥ sarvaratnavicitritaḥ
सहस्र-स्तम्भों वाले प्रासाद से आगे, एक वायु-योजन की दूरी पर ‘मनः’ नाम का महान् भवन है, जो समस्त रत्नों से विचित्र रूप से अलंकृत है।