भण्डपुत्रशोकः (Bhaṇḍa’s Lament for His Sons) — Lalitopākhyāna Episode
एतदेव विनाशाय शल्यवद्बाधते मनः / यत्स्त्री समागत्य हठान्नि हन्ति सुभटान्रणे
etadeva vināśāya śalyavadbādhate manaḥ / yatstrī samāgatya haṭhānni hanti subhaṭānraṇe
विनाश के लिए केवल यही बात मन को शल्य (कांटे) की तरह पीड़ा दे रही है कि एक स्त्री ने आकर युद्ध में महान योद्धाओं को बलपूर्वक मार डाला।