विषङ्गपलायनम् (Viṣaṅga-palāyanam) — Aftermath of the First Battle Day
मन्त्रिणीदण्डनाथे च न तां विजहतू रणे / प्रेक्षकत्व मनुप्राप्ते तृष्णीमेव बभूवतुः
mantriṇīdaṇḍanāthe ca na tāṃ vijahatū raṇe / prekṣakatva manuprāpte tṛṣṇīmeva babhūvatuḥ
मन्त्रिणी और दण्डनाथ भी रण में उसे छोड़कर न गए। जब वे केवल दर्शक बनकर रह गए, तब दोनों मौन ही हो गए।