मदनकामेश्वरप्रादुर्भावः
Manifestation of Madana-Kāmeśvara
त्वामेव हि सृजस्यादौ त्वमेव ह्यवसि क्षणात् / भजस्व पुरुषं कञ्चिल्लोकानुग्रहकाम्यया
tvāmeva hi sṛjasyādau tvameva hyavasi kṣaṇāt / bhajasva puruṣaṃ kañcillokānugrahakāmyayā
तुम ही आदि में सृष्टि करती हो, और तुम ही क्षण भर में पालन करती हो; लोकों के अनुग्रह की इच्छा से किसी पुरुष का वरण करो।