मोहिनी-प्रादुर्भावः (Mohinī’s Manifestation) — Narrative Prelude to the Bhandāsura Cycle
शिवेनैवमवज्ञाता दुःखिता शैलकन्यका / अनुज्ञया ततः पित्रोस्तपः कर्तुमगाद्वनम्
śivenaivamavajñātā duḥkhitā śailakanyakā / anujñayā tataḥ pitrostapaḥ kartumagādvanam
शिव द्वारा इस प्रकार तिरस्कृत होकर शैलकन्या (पार्वती) दुःखी हुई। तब पिता की अनुमति लेकर वह तप करने हेतु वन को चली गई।