मोहिनी-प्रादुर्भावः (Mohinī’s Manifestation) — Narrative Prelude to the Bhandāsura Cycle
तं दृष्ट्वा कुपितः शूली त्रैलोक्यदहनक्षमः / तार्तीयं चक्षुरुन्मील्य ददाह मकरध्वजम्
taṃ dṛṣṭvā kupitaḥ śūlī trailokyadahanakṣamaḥ / tārtīyaṃ cakṣurunmīlya dadāha makaradhvajam
उसे देखकर शूलधारी शिव क्रोधित हुए, जो त्रैलोक्य को भस्म करने में समर्थ हैं। उन्होंने तीसरा नेत्र खोलकर मकरध्वज (कामदेव) को जला डाला।