Mānasasṛṣṭi-varṇana (Account of Mind-born Creation) | मानससृष्टिवर्णनम्
तस्यैकसप्ततियुगं मन्वन्तरमिहोच्यते / लब्ध्वा तु पुरुषः पत्नीं शतरूपामयोनिजाम्
tasyaikasaptatiyugaṃ manvantaramihocyate / labdhvā tu puruṣaḥ patnīṃ śatarūpāmayonijām
उसका मन्वन्तर यहाँ इकहत्तर युगों का कहा गया है। और उस पुरुष ने अयोनिजा शतरूपा को पत्नी रूप में प्राप्त किया।