Varāha-uddhāraṇa and the Re-constitution of Bhū-maṇḍala
Earth after Pralaya
सत्त्वं कृतं रजस्त्रेता द्वापरं तु रजस्तमः / कलिस्तमस्तु विज्ञेयं गुणवृत्तं गुमेषु तत्
sattvaṃ kṛtaṃ rajastretā dvāparaṃ tu rajastamaḥ / kalistamastu vijñeyaṃ guṇavṛttaṃ gumeṣu tat
कृतयुग सत्त्वप्रधान है, त्रेतायुग रजोगुणस्वरूप है। द्वापर में रज और तम का मिश्रण है, और कलियुग को तमोगुणप्रधान जानना चाहिए; यही युगों में गुणों की प्रवृत्ति है।