Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
तेषां ते यान्ति कर्माणि प्राक् सृष्टानि स्वयंभुवा / तान्येव प्रतिपद्यन्ते सृज्यमानाः पुनः पुनः
teṣāṃ te yānti karmāṇi prāk sṛṣṭāni svayaṃbhuvā / tānyeva pratipadyante sṛjyamānāḥ punaḥ punaḥ
उनके कर्म, जो स्वयम्भू ने पहले रचे थे, उन्हीं की ओर जाते हैं; वे प्राणी बार-बार सृजित होकर उन्हीं कर्मों को फिर-फिर प्राप्त करते हैं।