Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
नरकिन्नररक्षांसि वयः पशुमृगोरगान् / अव्ययं वा व्ययञ्चैव द्वयं स्थावरजङ्गमम्
narakinnararakṣāṃsi vayaḥ paśumṛgoragān / avyayaṃ vā vyayañcaiva dvayaṃ sthāvarajaṅgamam
वह नर, किन्नर और राक्षस; पक्षी, पशु, मृग और सर्पों को रचता है; तथा अव्यय और व्यय—दोनों प्रकार के स्थावर-जङ्गम जगत को भी।