Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
तुल्य युगसहस्रस्य वसन्कालमुपास्यतः / स्वर्णपत्रेप्रकुरुते ब्रह्मत्वादर्शकारणात्
tulya yugasahasrasya vasankālamupāsyataḥ / svarṇapatreprakurute brahmatvādarśakāraṇāt
युगों के सहस्र के तुल्य काल तक निवास कर, उपासना करते हुए, ब्रह्मत्व के दर्शन-कारण से वह स्वर्ण-पत्र पर (सृष्टि का) विधान करता है।