Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
दक्षिणा त्दृदयो योगी श्रद्धासत्त्वमयो विभुः / उपाकर्मरुचिश्चैव प्रवर्ग्यावर्तभूषणः
dakṣiṇā tdṛdayo yogī śraddhāsattvamayo vibhuḥ / upākarmaruciścaiva pravargyāvartabhūṣaṇaḥ
वह दक्षिणा से दृढ़-हृदय योगी, श्रद्धा और सत्त्व से बना विभु है। उपाकर्म में रुचि रखने वाला, प्रवर्ग्य-आवर्त से भूषित है।