मन्वन्तरानुक्रमवर्णनम् (Enumeration of Manvantara Cycles) — with focus on Svārociṣa Manvantara
यश्चैवं श्रावयेन्मर्त्यः पृथोर्वैन्यस्य संभवम् / ब्राह्मणेभ्यो नमस्कृत्य न स शोचेत्कृताकृतम्
yaścaivaṃ śrāvayenmartyaḥ pṛthorvainyasya saṃbhavam / brāhmaṇebhyo namaskṛtya na sa śocetkṛtākṛtam
जो मनुष्य इस प्रकार पृथु वैन्य के उत्पत्ति-प्रसंग को ब्राह्मणों को नमस्कार करके सुनाए, वह किए-अनकिए का शोक नहीं करता।