मन्वन्तरानुक्रमवर्णनम् (Enumeration of Manvantara Cycles) — with focus on Svārociṣa Manvantara
धन्यं यशस्यमायुष्यं पुण्यं वेदैश्च संमितम् / रहस्यमृषिभिः प्रोक्तं शृणुयाद्यो ऽनसूयकः
dhanyaṃ yaśasyamāyuṣyaṃ puṇyaṃ vedaiśca saṃmitam / rahasyamṛṣibhiḥ proktaṃ śṛṇuyādyo 'nasūyakaḥ
यह कथा धन्य करने वाली, यशदायिनी, आयुष्यवर्धक, पुण्यरूप और वेदसम्मत है; ऋषियों द्वारा कहा गया यह रहस्य जो अनसूयक हो, वही सुने।