युगप्रजालक्षणम् ऋषिप्रवरवर्णनं च
Yuga–Prajā-Lakṣaṇa and the Enumeration of Eminent Ṛṣis
अन्यस्यान्यस्य चौक्तिर्या बुधैः सोक्ता पुराकृतिः / यो ह्यत्यन्तपरोक्षार्थः स पुराकल्प उच्यते
anyasyānyasya cauktiryā budhaiḥ soktā purākṛtiḥ / yo hyatyantaparokṣārthaḥ sa purākalpa ucyate
एक के विषय में दूसरे की जो उक्ति विद्वानों ने कही है, वह ‘पुराकृति’ कहलाती है। और जिसका अर्थ अत्यन्त परोक्ष हो, उसे ‘पुराकल्प’ कहा जाता है।