चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
अथर्वगर्यजुषां साम्नां वेदेष्विह पृथक्पृथक् / ऋषीणां तप्यतामुग्रं तपः परमदुष्करम्
atharvagaryajuṣāṃ sāmnāṃ vedeṣviha pṛthakpṛthak / ṛṣīṇāṃ tapyatāmugraṃ tapaḥ paramaduṣkaram
यहाँ वेदों में अथर्व, ऋक्, यजुः और साम—ये सब अलग-अलग हैं। तप में रत ऋषियों का उग्र तप अत्यन्त दुष्कर है।