Amāvasyā-Pitṛtarpaṇa: Purūravas and the Soma-Based Ancestral Offering (अमावस्या-पितृतर्पण / सोमतर्पण-विधि)
अग्निष्वात्ताः स्मृतास्तेषां होमिनो ऽयाज्ययाजिनः / तेषां तु धर्मसाधर्म्यात्स्मृताः सायुज्यगा द्विजैः
agniṣvāttāḥ smṛtāsteṣāṃ homino 'yājyayājinaḥ / teṣāṃ tu dharmasādharmyātsmṛtāḥ sāyujyagā dvijaiḥ
वे पितर ‘अग्निष्वात्त’ कहे गए हैं—हवन करने वाले और अयाज्य का भी यजन करने वाले। धर्म-साम्य के कारण द्विजों ने उन्हें सायुज्य-गामी बताया है।