Amāvasyā-Pitṛtarpaṇa: Purūravas and the Soma-Based Ancestral Offering (अमावस्या-पितृतर्पण / सोमतर्पण-विधि)
सुषुम्णाप्यायमानस्य भागं भागमहः क्रमात् / कलाः क्षीयन्ति ताः कृष्णाः शुक्ला चाप्याययन्ति तम्
suṣumṇāpyāyamānasya bhāgaṃ bhāgamahaḥ kramāt / kalāḥ kṣīyanti tāḥ kṛṣṇāḥ śuklā cāpyāyayanti tam
सुषुम्णा से पोषित होते हुए उसके दिन-क्रम के अनुसार भाग-भाग से कलाएँ क्षीण होती हैं—वे कृष्ण कलाएँ; और शुक्ल कलाएँ उसे बढ़ाती हैं।