ध्रुवचर्याकीर्तनं / Dhruva-caryā-kīrtana
Account of Dhruva’s Course and Related Cosmological Ordering
संपद्वसुस्तु यो रश्मिः स योनिर्लोहितस्य तु / षष्ठस्त्वर्व्वावसू रश्मिर्योनिस्तु स बृहस्पतेः
saṃpadvasustu yo raśmiḥ sa yonirlohitasya tu / ṣaṣṭhastvarvvāvasū raśmiryonistu sa bṛhaspateḥ
जो किरण ‘संपद्वसु’ है, वही ‘लोहित’ (मंगल) की योनि/उत्पत्तिस्थान है। और छठी ‘अर्वावसु’ किरण बृहस्पति की योनि कही गई है।