प्लक्षद्वीपवर्णनम्
Description of Plakṣa-dvīpa
क्षयो वा परिणामो वा अन्तो वापि न विद्यते / अनन्त एष सर्वत्र एवं ज्ञानेषु पठ्यते
kṣayo vā pariṇāmo vā anto vāpi na vidyate / ananta eṣa sarvatra evaṃ jñāneṣu paṭhyate
उसका न क्षय है, न परिवर्तन, न ही कोई अन्त; वह सर्वत्र अनन्त है—ऐसा ही शास्त्रों के ज्ञान में पढ़ा जाता है।