प्लक्षद्वीपवर्णनम्
Description of Plakṣa-dvīpa
परिच्छिन्नः समन्ताच्च उदकेनावृतस्तु सः / आलोकात्परतश्चापि ह्यण्डमा वृत्य तिष्ठति
paricchinnaḥ samantācca udakenāvṛtastu saḥ / ālokātparataścāpi hyaṇḍamā vṛtya tiṣṭhati
वह चारों ओर से सीमित है और जल से आवृत है; ‘आलोक’ के परे भी वह अण्ड (ब्रह्माण्ड) को घेरकर स्थित रहता है।